जारी है नारी पर वार.. कहाँ है मोदी सरकार !

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जारी है नारी पर वार.. कहाँ है मोदी सरकार !

तीन साल पहले देश के आवाम ने मोदी जी को जादुई आकड़े वाला सत्ताधारी मुकुट पहनाया था  | देश की महिलाओं ने भी अपनी पूर्ण भागीदारी निभाते हुए मन बना लिया था कि शायद अब उनके भी अच्छे दिन आयेंगे | आज तीन साल उपरांत एक हम सभी को एक बार नजर डालने की आवश्यकता कि महिलाओं को भारतवर्ष में कितना सम्मान प्राप्त हुआ है | आज वे कितनी सुरक्षित हैं, उनकी सामाजिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य की स्थिति में कितना सकारात्मक परिवर्तन आया है..

समाज में तरक्की के प्रमुख माप-दंड हैं बेहतर शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, राजनितिक योगदान, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सम्मान | अगर हम शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र को तीन सालों में ना भी मापें, तो भी ना तो महिलाओं के सामाजिक सम्मान में कोई इजाफा हुआ है, ना ही उनके लिए आज भी देश में सुरक्षित माहौल बना है ना ही महिलाओं के स्वास्थ्य में प्रभावशाली सुधार हो पाया हैं और उनके राजनितिक योगदान पर पहले के ही भांति ग्रहण लगा हुआ है |

महिला स्वास्थ्य पर नजर डाले तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी | एक तरफ जहाँ देश की लड़कियां अपनी मेहनत के बल पर सिविल सर्विसेज में अवल्ल आ रहीं हैं, अपना और अपने परिवार को नाम रोशन कर रही है और वहीँ दूसरी तरफ प्रसव के दौरान हर एक घंटे में पाँच मातृ शक्ति मौत के भेंट चढ़ रहीं है | विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2016 में मातृत्व के दौरान ही महिलाओं की मृत्युदर में बढ़ोतरी हुई है जिसका प्रमुख कारण खून की कमी, अनीमिया, कुपोषण और बेहतर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का ना मिल पाना है | विश्व स्वास्थ्य संगठन  और यूनीसेफ  के आँकड़े महिलाओँ के स्वास्थ्य़ की भयानक हकीकत पेश करते है आकड़ो के अनुसार पिछले तीन सालों में देश की बालिकाओं, माताओं, वृद्धाओं की स्वास्थ्य में लगातार गिरावट जारी है |

महिला सुरक्षा और सम्मान की स्थिति देखें तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार पिछले चार वर्षों में महिलाओं के खिलाफ 34 प्रतिशत अपराधों में बढ़ोत्तरी हुई है |  समाज पर ऊगंली उठाने के साथ-साथ सत्ता पक्षो से पिछले तीन सालों में बहुत से ऐसे मामले सामने आएं हैं जो महिलाओं के बारे में केंद्र सरकार व उनके मंत्रिमडल की दकियानूसी, खतरनाक और पिछड़ी सोच को दर्शाते हैं | इस लेख में मै मोदी जी की निजी-जिंदगी पर बात नहीं करुंगी पर पिछले तीन सालों के कार्यकाल के दौरान महिलाओं के प्रति उनकी मानसिकता को समझना चाहूंगी

प्रधानसेवक जी का महिलाओं के प्रति दोयमदर्जे का एक उदाहरण है कि ,हाल ही में भारत दौरे पर आई बांग्लादेश की प्रधानमंत्री माननीया शेख हसीना जी को मोदी जी यह कहते हुए संबोधन किया “महिला होने के बावजूद” वह देश को अच्छी तरह चला रहीं हैं | जिसका क्या मतलब निकाला जाये ?

जिस भारतीय समाज में महात्मा गाँधी, राजा राम मोहन रॉय, धोंदो केशव कार्वे , ईश्वर चंद विद्या सागर जैसे लोगों ने भारतीय महिलाओं को सशक्त बनाने की गहरी और सुदृढ़ नीव रखी थी आज ऐसा प्रतीत होता है कि बीजेपी और आरएसएस के विचारक सुदृढ़ तरीके से उसे नष्ट करने पर तुले हुए हैं  |

उत्तर प्रदेश के नव-निर्वाचित मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के विचारों से भी देश की नारी भली-भांति परिचित है | योगी जी के अनुसार तो महिलाओं का राजनीति में योगदान एक प्रयोग के रूप में ही देखा जाना चाहिए और महिलाओं की लोकसभा में तैतीस प्रतिशत हिस्सेदारी भी उन्हें रास नहीं आती | आज जहाँ देश की महिलायें आसमान में झण्डे लहरा रहीं हैं, ओलम्पिक खेलों में पदक लाकर देश का मान बढ़ा रहीं हैं, देश के अनेकों बैंकों की मुखिया-महिलाएं हैं ऐसे गौरांवित पलों के बीच भी वे कहतें हैं कि महिलाओं को अपने पिता, भाई और पति के संरक्षण में ही रहना चाहिए, महिलाओं के प्रति योगी जी का द्धेष इतना मुखर है की वो  स्त्रियों को सर्वथा स्वतंत्र या मुक्त छोड़ने योग्य नहीं समझते ” इतना ही नहीं उनका यह भी कहना है कि पुरुषों में जब भी महिलाओं के गुण आते हैं तो वे देव बन जाते हैं और महिलाओं में जब पुरषों के गुण आते हैं तब वे आसुरी रुप धारण कर लेती है |

बीजेपी में महिलाओं की क्या स्थिति है यह पार्टी के लोकसभा सदस्य विनय कटियार की बातों से प्रत्यक्ष होता है जब वे श्रीमती प्रियंका गाँधी पर एक बेतुकी टिप्पणी में उनकी सुंदरता की तुलना बीजेपी की महिला नेताओं से करते हुए कहते हैं कि बीजेपी में तो और भी ख़ूबसूरत नेता हैं | महिला विरोधी विचार या टिप्पणियाँ बीजेपी के लिए कोई नयी बात नहीं है चाहे वह श्रीमती सोनिया गाँधी जी को जर्सी गाय बुलाना हो या शशि थरूर जी की पचास करोड़ की गर्ल-फ्रेंड का हवाला देना हो या युवा लड़की की जासूसी करना हो |

मौलिक और नवीन सोंच रखने वाली और बुलंदी से अपनी बात कहने वाली हर महिला सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक,विचारक, समाज सुधारक, पत्रकार को आरएसएस और बीजेपी प्रायोजित समर्थकों की भीड़ गंदी, अभद्र भाषा से  डरा-धमका के, हमला करवा कर मुंह बंद करवाना चाहती हैं | चाहे वो प्रसिद्ध पत्रकार बरखा दत्त हों, पत्रकार और लेखिका स्वाति चतुर्वेदी हों , पत्रकार और लेखिका राणा अयूब हों जिनके ट्वीटर पर गलियों में पदमश्री स्तर वाली गलियां भी दिखेंगी या फिर दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गुरमेहर कौर हों | इन सभी को जान से मारने की धमकी देने वाले, बलात्कार करने की धमकी देने वाले और कोई नहीं बल्कि धरती पर भारतीय संस्कृति की रक्षा करने वाली एक मात्र ठकेदार पार्टी बीजेपी के प्रायोजित ट्रोल्स की एक टुकड़ी है जिसके अनौपचारिक संरक्षक माननीय मोदी जी जान पड़ते हैं क्योंकी वे इन ट्रॉल्स को न केवल ट्विटर पर फॉलो करते हैं बल्कि उनके साथ फोटो भी खिचवातें हैं |

देश की एक सुप्रसिद्ध लेखिका सुश्री अरुंधति  रॉय का हश्र भी कुछ ऐसा ही हुआ | उनके लिए तो लोकसभा सदस्य परेश रावल ने तो बेशर्मी से यह तक कह दिया कि कश्मीर में पत्थरबाजों के सामने सेना की जीप पर रांय को बाँधना चाहिए |

ऐसा प्रतीत होता है कि देश में जिंतनी भी मुखर महिलाएं हैं उन सभी को येन-केन प्रकारेण चुप कराने की सुपारी भाजपा के लोकसभा सदस्यों को दी गयी है | यह कहना अतिशियोक्ति नहीं होगी कि मध्य कालीन युग में जिस प्रकार मुखर, शक्तिशाली महिलाओं को जन आक्रोश के हवाले कर दिया जाता था, शायद उसी प्रथा को वापस लानी की तैयारी की जा रही है | कोशिश की जा रही है की महिलायें केवल भोग की और सौन्दर्य की वस्तुएं बन कर रह जाएँ | मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौड़ हों या कुछ दिन पहले कच्छ में हुआ नालियाँ गैंग-रेप जिस में बीजेपी नेताओं के चाल-चरित्र और असली चेहरे की पहचान होती है | रोहतक-हरियाणा गैंग-रेप हो या महिला उत्पीड़न का कोई भी वाक्या हो देश के 56 इंच के सीने वाले प्रधान-सेवक जी और देश के पहले चौकीदार मौन धारण कर के बैठे हैं या सो रहे हैं |

ऐसा मालूम पड़ता है की देश की तत्कालीन सरकार एक सुनियोजित और प्रायोजित तरीके से भारतीय महिलाओं को हाशिये की ओर ढकेलने प्रयास कर रही है | देखना यह है कि साधारण जन मानस में इनकी पाँखडी कलई कब खुलेगी |

(Richa Pandey Mishra)



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