दिल्ली पुलिस ने AAP विधायकों को ख़िलाफ़ ग़ैरकानूनी तरीके से FIR दर्ज़ की

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दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के तीन विधायकों के ख़िलाफ़ ग़ैरकानूनी तरीक़े से एफ़आईआर दर्ज़ की है। एक महिला ने यह आरोप लगाया था कि विधानसभा परिसर में आम आदमी पार्टी के तीन विधायकों ने उसके साथ छेड़छाड़ की है और इसी कथित मामले में दिल्ली पुलिस ने यह ग़ैरकानूनी मुकदमा दर्ज़ किया है।
 
आम आदमी पार्टी कार्यालय में आयोजित हुई प्रैस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि विधानसभा परिसर में हुई किसी भी कथित घटना के संबंध में विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति के बिना किसी भी तरह का मुकदमा दर्ज़ नहीं किया जा सकता और दिल्ली पुलिस ने GNCTD act, 1991 की धारा 18 के ख़िलाफ़ जाते हुए विधानसभा के तीन सद्स्यों के ख़िलाफ़ ग़ैरकानूनी तरीके से मुकदमा दर्ज़ किया है।
 
जिस महिला की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने यह मामला दर्ज़ किया है उस महिला से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं-
1.  28 जून के दिन विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता के कार्यालय ने इस महिला को विधानसभा में दाख़िल कराया जबकि खुद विजेंद्र गुप्ता उस दिन विधानसभा में मौजूद नहीं थे।
2.  इस महिला के पास बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता के कार्यालय तक ही जाने की अनुमति थी लेकिन यह महिला बिना इजाज़त के विधानसभा की गैलरी तक पहुंच गई थीं
3.  अगले दिन यानि 29 जून को यह महिला एक बार फिर से विधानसभा में दाखिल हुई और इस बार विधायक कपिल मिश्रा ने इस महिला को अपनी कार का ड्राइवर बनाकर विधानसभा परिसर में एंट्री दिलाई
 
 
दिल्ली पुलिस भी हुई बेनकाब –   
 
·         पिछले साल जून के महीने में रामलीला मैदान में एमसीडी के तीनों सदनों के एक साझा मॉक सत्र में बीजेपी पार्षदों ने आम आदमी पार्टी के पार्षद राकेश कुमार के साथ मारपीट की थी
·         दिल्ली पुलिस ने अपनी सहूलियत के हिसाब से बीजेपी पार्षदों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ करने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि चूकि यह नगर निगम के सदन का मामला है तो बिना मेयर की अनुमति के पुलिस मुकदमा दर्ज़ नहीं कर सकती
·         रामलीला मैदान के मॉक सत्र को सदन के रुप में दिल्ली पुलिस कैसे ले सकती है?
·         आखिर किस कानून के तहत दिल्ली पुलिस ने एक दलित पार्षद को पीटने वाले बीजेपी पार्षदों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज़ करने से मना कर दिया?
 
 
दिल्ली पुलिस से सवाल –
 
§  विधानसभा की इस कथित घटना के संदर्भ में उस महिला ने कब दिल्ली पुलिस को शिकायत दर्ज़ कराई?
§  दिल्ली पुलिस उस महिला को मेडिकल जांच के लिए किसी नज़दीकी अस्पताल में ले जाने कि बजाए विधानसभा से भौगोलिक तौर पर दूर स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ही क्यों लेकर गई?
§  क्या दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज़ करने से पहले किसी तरह की शुरुआती जांच-पड़ताल की थी?
§  क्या यह संभव है कि विधानसभा में अनाधिकृत तौर पर प्रवेश पाने वाली महिला जिसके साथ छेड़छाड़ हुई हो वो अपने घर जाने के बाद अगले ही दिन दोबारा उसी जगह पर आती है और घटना के 24 घंटे के बाद पुलिस के पास शिकायत दर्ज़ कराने पहुंचती है
§  विधानसभा परिसर के अंदर हुई किसी भी कथित घटना को लेकर बिना विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति के दिल्ली पुलिस आखिर कैसे FIR दर्ज़ कर सकती है?
§  दिल्ली पुलिस को GNCTD act, 1991 की धारा 18 (3) का अध्यन कर लेना चाहिए जिसमें यह कहा गया है कि दिल्ली विधानसभा को विशेषाधिकार के मामले में ठीक वही अधिकार प्राप्त हैं जो देश की संसद को प्राप्त हैं।
§  दिल्ली पुलिस के पास FIR दर्ज़ करने के दो नियम कैसे हो सकते हैं? जिसमें एक नियम के तहत पुलिस दलित पार्षद की पिटाई करने वाले बीजेपी पार्षदों के ख़िलाफ़ निगम के मेयर की अनुमति के बिना FIR दर्ज़ करने से मना कर देती है और दूसरे मामले में दिल्ली पुलिस दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति लिए बिना ही आम आदमी पार्टी के विधायकों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज़ कर देती है। 


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