पनामा पेपर्स में कई भारतीय हस्तियों के भी नाम, केंद्र सरकार नहीं लेती कोई एक्शन: आशुतोष

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पनामा पेपर्स के आधार पर पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पाक प्रधानमंत्री को किया अपदस्थ

 पनामा पेपर्स में भारत की कई नामचीन हस्तियों के नाम शामिल होने के बावजूद भारत सरकार ऐसे लोगों पर कोई एक्शन नहीं लेती है तो वहीं दूसरी तरफ़ पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट पनामा पेपर्स के आधार पर वहां के प्रधानमंत्री को दोषी पाते हुए अपदस्थ कर देती है। पाकिस्तान अपने बेहद कमज़ोर लोकतंत्र के लिए जाना जाता है लेकिन बावजूद इसके वहां के सुप्रीम कोर्ट ने यह बड़ा फ़ैसला देते हुए एक नज़ीर पेश की है जबकि दूसरी तरफ़ दुनिया के सबसे मज़बूत लोकतंत्र में गिनती रखने वाले भारत देश की सरकार पनामा पेपर्स में मौजूद भारतीय हस्तियों को ना केवल बचाने में लगी हुई है बल्कि उन पर लगे आरोपों का संज्ञान तक नहीं लिया जा रहा है।

 

पार्टी कार्यालय में आयोजित हुई प्रैस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि ‘पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पाक प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को पनामा पेपर में नाम होने पर और जो आरोप नवाज़ शरीफ़ और उनके परिवार पर लगे थे उन्हें प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर अपदस्थ कर दिया है लेकिन वहीं दूसरी तरफ़ यह बड़ी अजीब बात है कि भारत में ऐसे लोगों और हस्तियों पर भारत सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती है जिनके नाम पनामा पेपर्स में हैं और गंभीर आरोप उनके ख़िलाफ़ हैं।‘

 

‘छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह हों या फिर अमिताभ बच्चन और उनकी बहू एशवर्य राय बच्चन, अजय देवगन, डीएलफ़ के मालिक के पी सिंह, पीएम नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी, अपोलो टायर और इंडियाबुल्स के मालिक समेत तकरीबन 500 भारतीय हस्तियों और उद्योगपतियों के नाम पनामा पेपर्स में समाने आए हैं लेकिन बावजूद इसके भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार इन लोगों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, कार्रवाई की बात तो दूर पनामा के इन आरोपों का संज्ञान तक नहीं लिया जा रहा है।‘

 

‘भारत के लोकतंत्र की गिनती दुनिया के सबसे मज़बूत लोकतंत्र में होती है लेकिन बावजूद इसके यहां पनामा पेपर्स के उन आरोपों पर कोई जांच एजेंसी कार्रवाई करने को तैयार ही नहीं है। सरकार ने इन सभी जांच एजेंसियों को भयंकर दबाव में रखा हुआ है। जबकि पाकिस्तान जैसे बेहद कमज़ोर लोकतंत्र वाले और आतंकवाद की पनाहगाह वाले देश में सुप्रीम कोर्ट अपने प्रधानमंत्री तक को पनामा पेपर के मामले में दोषी ठहराते हुए अपदस्थ कर देता है।‘



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