भाजपा और RSS करना चाहते हैं शिक्षा का भगवाकरण

0
88

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि ‘यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज देश में शिक्षा का भगवाकरण करने की कोशिश की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी, आरएसएस से जुड़े लोग और संस्थाएं चाहती हैं देश की शिक्षा को पूरी तरह से भगवा रंग में रंग दिया जाए। हाल ही में आरएसएस से जुड़े एक न्यास ने एनसीईआरटी को स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव करने के कुछ सुझाव दिए हैं जो सीधे तौर पर आरएसएस की शिक्षा के प्रति उनकी छोटी और बेहद खराब सोच को दर्शाता है। दूसरी तरफ़ जेएनयू के वाइस चांसलर कहते हैं कि विश्वविद्यालय में अब छात्रों को प्रेरित करने के लिए एक टैंक रखना चाहिए, मुझे समझ में नहीं आता कि टैंक, गोला बारुद और हथियारों से छात्रों को कौन सी प्रेरणा मिलेगी?“

 

पत्रकारों से बात करते हुए पार्टी की वरिष्ठ नेता और पीएसी सदस्य अतिशि मार्लेना ने कहा कि ‘एनसीईआरटी ने स्कूल पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने के लिए जनता से कुछ सुझाव मांगे थे जिसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने दीना नाथ बत्रा की अध्यक्षता में हाल ही में एनसीईआरटी को शिक्षा को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं जो सीधे तौर पर आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी की शिक्षा के भगवाकरण करने की सोच को परिलक्षित करते हैं। दीना नाथ बत्रा आरएसएस से जुड़े हैं और आरएसएस से जुड़े लोगों की इस संस्था के द्वारा दिए गए सुझाव के कुछ बिंदु निम्नलिखित हैं-

 

  • अंग्रेजी, उर्दू और अरबी शब्द, क्रांतिकारी कवि पाश की एक कविता और मिर्ज़ा गालिब के दोहे हटा दें।
  • रवींद्रनाथ टैगोर के विचार हटा दें
  • चित्रकार एम एफ हुसैन की आत्मकथा का सार हटा दें
  • 1984के दंगों पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक माफी मांगी थी और एक वाक्य जिसमें “2002में करीब 2,000 मुसलमान गुजरात में मारे गए थे” को हटाने का सुझाव है
  • न्यास चाहता है कि हिंदी पाठ्यपुस्तकों में यह जिक्र करना चाहिए कि मध्ययुगीन सूफी रहस्यवादी अमीर खुसरो ने “हिंदुओं और मुसलमानों के बीच की दरार बढ़ाई”।

 

 

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु का आरएसएस के इस न्यास ने ज़िक्र किया है:

  • राजनीति विज्ञान, कक्षा बारहवीं:

* 1984 के दंगों के संदर्भ में, “2005 में अपने संसद के भाषण के दौरान, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हिंसा पर अफसोस जताया था और सिख विरोधी हिंसा के लिए देश से माफी मांगी।”

* एक पैराग्राफ कहता है कि राम मंदिर आंदोलन “भाजपा की वृद्धि और हिंदुत्व की राजनीति से जुड़ा था”।

* 2002 की गोधरा घटना का विवरण कहता है: “एक ट्रेन को आग लग गई … और संदेह है कि मुस्लमानों की वजह से आग लग गई।” न्यास चाहता है कि “आग लग गई” की जगह मुस्लमानों ने “आग लगा दी” होना चाहिए और इसमें से “संदेह” शब्द को हटा दिया जाए।

* एक वाक्य में कहा गया है कि “क्या हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो ऐसे नरसंहार की योजना बना रहे थे … उन्हें कम से कम एक राजनीतिक तरीके (मतदान) से इसका सबक सिखाया जाए”।

 

  • हिंदी पाठ्यपुस्तकों:

* यहां कई शब्द हैं जिन्हें न्यास हटवाना चाहता है जैसे: कुलपति, कार्यकर्ता, मार्जिन, व्यवसाय, रीढ़ की हड्डी, पाठ, शाही अकादमी (अंग्रेजी में); बेटाटिब, पॉशाक, ताकत, इलाक, अस्सार, इमान, जोखिम, मेहमन-नावाजी, सर्व-आम (उर्दू / अरबी शब्द); उलू कहीं का, कमबख्त, बदमाश, लुच्चे-लफंगे, चमार, भंगियों (“अपमानजनक” शब्द)

* ग़ालिब की एक लाइन, “हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन / दिल को खुश रखने के लिए ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है”।

* कक्षा IX पुस्तक में रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता है

 

 

  • इतिहास:

* कक्षा सातवीं: मुगल सम्राट अकबर ने “सुलह-ए-कुल नीति” की शुरुआत की थी, जिसमें कहा गया था कि “सभी धर्मों के अनुयायियों का एक समान स्थान है, सभी धर्मों के लोगों को समान समझा जाए” लेकिन न्यास इस लाइन को हटवाना चाहता है

 

 

‘ऐसे बहुत से बिंदु हैं जिनका आरएसएस की इस संस्था ने अपने सुझावों में ज़िक्र किया है, आरएसएस से जुड़ा यह न्यास चाहता है कि उनके एजेंडे के नज़रिए से वो वाक्य, शब्द और पाठ इत्यादि किताबों से हटाए जाएं और उनके ये सुझाव यह दर्शाते हैं कि भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस मिलकर इस देश की शिक्षा प्रणाली को बर्बाद करना चाहते हैं। इनकी कोशिश देश में एक ऐसा नफ़रत का माहौल बनाने की है जिसमें इनकी राजनीतिक रोटियां सिंकती रहें और ये देश के लोगों को अपनी सोच का ग़ुलाम बना लें।’

‘देश में भाजपा शासित राज्य सरकारें शिक्षा पर बेहद कम खर्च करती हैं और उन राज्य के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ना और लिखना तक नहीं आता है। भाजपा और आरएसएस की कोशिश इस देश के बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर एक कामयाब इंसान बनाने की नहीं बल्कि उन्हें आरएसएस के एजेंडे के तहत उनको अपना राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश है और वो पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से ऐसा करने का प्रयास भी कर रहे हैं जो बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को यह सलाह है कि अगर शिक्षा के क्षेत्र में वाकई परिवर्तन लाना है और देश के उज्जवल भविष्य के लिए देश के बच्चों को एक बेहतर शिक्षा प्रणाली देकर कामयाब इंसान बनाना है तो वो दिल्ली के सरकार की शिक्षा नीति को आकर क़रीब से देखें और उसका अध्यन करें।

 



*This is a personal blog. All content provided on this blog is for informational purposes only. The owner of this blog makes no representations as to the accuracy or completeness of any information on this site.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here