राज्यसभा पर AAP की रणनीति

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3 जनवरी 2018 को आम आदमी पार्टी ने अपने राज्यसभा के 3 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की। जिनमें से पहला नाम था संजय सिंह का, जिन्होंने 16 साल तक स्ट्रीट हॉकर्स के लिए आंदोलन किया है। ये टीम अन्ना के कोर मेंबर भी थे और पिछले 5 सालों से पार्टी के संगठन को मजबूत करने का काम भी कर रहे हैं। पंजाब में इनके नेतृत्व में पार्टी को 22 सीट और यूपी निकाय चुनावों में 41 सीट मिली। संजय सिंह जी आजतक आम आदमी पार्टी की टिकट पर चुनाव नहीं लड़े और अब राज्यसभा जाने के साथ ही वे जमीन पर पार्टी का संगठन मजबूत करने का काम भी जारी रखेंगे इसलिए उन्हें राज्यसभा भेजने के निर्णय पर पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता खुशी से बधाइयां दे रहे हैं।

अब बात करते हैं अगले दो नामों की जिनके नाम पर निष्पक्ष गोदी मीडिया, BJP और कोंग्रेस के साथ ही आम आदमी पार्टी के भीतर भी कोहराम मचा हुआ है। ये नाम हैं सुशील गुप्ता और नारायण दास गुप्ता। सुशील गुप्ता के कई स्कूल और हॉस्पिटल चलते हैं दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में। ये सामाजिक सेवा में भी कार्यरत हैं। ND गुप्ता जाने माने अर्थशास्त्री हैं और आम आदमी पार्टी के एकाउंट्स भी 2 साल से संभाल रहे हैं। पार्टी के लिए कई क़ानूनी लड़ाइयां भी लड़ी हैं इन्होंने।

सुशील गुप्ता और ND गुप्ता दोनों ही साफ छवि के ईमानदार लोग हैं। लेकिन खुद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्त्ता राज्यसभा के लिए चुने हुए इन नामों से बहुत नाराज हैं की पार्टी के बाहर के लोगों को राज्यसभा क्यों भेजा गया मीरा सान्याल, आशुतोष, आशीष खेतान, राघव चड्डा, आतिशी मर्लिन या कुमार विश्वास को क्यों नहीं भेजा गया ? इन लोगों को ये समझना चाहिए की पार्टी को इन चेहरों की जरूरत लोकसभा चुनाव में ज्यादा है। ये पार्टी के वो मजबूत दावेदार नेता हैं जो लोकसभा चुनाव जीत कर लोकसभा के पटल पर आम आदमी पार्टी की आवाज बुलंद को कर सकते हैं।

कुछ कार्यकर्ता इस बात पर आपत्ति जता रहे हैं की बाहर के लोग जिन्होंने पार्टी के लिए आजतक कुछ नहीं किया उन्हें भेजना पार्टी के सिद्धान्तों के खिलाफ है। जबकी पार्टी ने पहले ही घोषणा कर दी थी की पार्टी के बाहर के कुछ लोगों को राज्यसभा भेजेंगे तब किसी कार्यकर्ता ने सिद्धान्तों के नाम पर विरोध नहीं जताया था।
रघुराम राजन, अरुणशौरि और यशवंत सिन्हा के नाम जब राज्यसभा के लिए बाहर आये थे तब तो सभी खुश थे इन लोगों ने आम आदमी पार्टी के लिए क्या किया है आजतक? इन लोगों को राज्यसभा भेजने पर किसी को आपत्ति नहीं थी फिर गुप्ता बंधुओं का इतना विरोध अनावश्यक है।

कुछ लोग आशंकित हैं की अगर इन गुप्ता बंधुओं ने शाजिया, बिन्नी की तरह पार्टी को धोखा दिया तो क्या होगा। बाहर के लोगों पर इतना भरोसा ठीक नहीं। उन सभी को ये मालूम होना चाहिए की दोनों गुप्ताओं को सिर्फ राज्यसभा का काम करना होगा पार्टी के दूसरे किसी काम में इनका हस्तक्षेप नहीं होगा। और अगर राज्यसभा में इन्होंने कुछ गलत किया तो पार्टी तुरंत उसी वक़्त दोनों को निकल कर उनकी जगह दूसरे व्यक्ती को राज्यसभा भेज सकती है क्योंकि उसके लिए वोटिंग पार्टी के MLA करते हैं ना की जनता। गुप्ता बंधुओं पर पार्टी की पूरी पकड़ है फिर दोनों ईमानदार भी हैं तो फिर इनसे दिक्कत क्या है। ये कोई लोकसभा या राज्य की विधानसभा का चुनाव थोड़े ही है की एक बार किसी को चुन लिया तो 5 साल तक कुछ नहीं कर सकते।

कुछ लोग सुशील गुप्ता के अमीर होने के कारण अरविन्द केजरीवाल पर पैसे लेकर टिकेट बेचने के भी आरोप लगा रहे हैं। जो अरविन्द केजरीवाल प्राइवेट स्कूलों और अस्पतालों जो जनता से मनमानी फ़ीस वसूल रहे थे उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही कर रहा है। जिसने अम्बानी से लेकर शीला दीक्षित तक के खिलाफ FIR कर दी थी वो पैसे लेकर टिकेट बेचेगा ऐसा मजाक समझ से परे है। इसमें सुशील गुप्ता जी सबसे बड़े बेवकूफ नजर आ रहे हैं जो BJP, कोंग्रेस की जगह अपने प्राइवेट स्कूल और अस्पतालों को मनमानी कमाई करने से रोकने वाले अरविन्द को ही पैसे देकर टिकेट खरीद रहे हैं।

राज्यसभा सीट पर आम आदमी पार्टी का निर्णय मास्टरस्ट्रोक भले ही साबित ना हो लेकिन स्ट्रेटेजीकली यह एक बहुत अच्छा निर्णय है। पार्टी का फोकस मुख्यतः शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था और अर्थशास्त्र पर है। इसलिए पार्टी इन्ही से सम्बंधित एक्सपर्ट्स को राज्यसभा भेजना चाहती थी। सुशील गुप्ता शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में एक्सपर्ट हैं और पार्टी की पॉलिसीज को राज्यसभा के पटल पर मुखरता से रख सकते हैं। इसके अतिरिक्त अक्टूबर 2017 तक ये दिल्ली की ट्रेडर्स कम्युनिटी के नेता भी रहे हैं और GST से परेशान व्यापारी वर्ग की समस्याओं को सुलझाने के लिए इनके दिए गए सभी सुझावों को दिल्ली सरकार ने लागू भी किया है। 2018 में जबकि देश का बजट पेश होने वाला है और देश की आर्थिक हालत बेहद खराब है ऐसी स्थिति में राज्यसभा में नारायण दास गुप्ता जी जैसे अर्थशास्त्री को भेजने का फैसला बिलकुल सही है।

सुशील गुप्ता को कल पहली बार बोलते हुए सुना। आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किये गये मानवता के कामों की जम की तारीफ की उन्होंने और साथ ही MCD के निकम्मेपन को भी कोसा। और दिल्ली सरकार को सभी क़ानूनी अधिकार दिलाने के लिए राज्यसभा में मांग उठाने का प्रण भी किया। सुशील गुप्ता के पार्टी और दिल्ली सरकार के लिए समर्पित ये भाव सुन कर यकीन हो गया की अरविन्द जी का निर्णय बिलकुल सही था।

आप कह सकते हैं की ये चुनाव और बेहतर हो सकता था। इसके लिए ही पार्टी ने इन्ही छेत्रों से सम्बंधित 18 बड़े एक्सपर्ट लोगों से संपर्क किया था किन्तु उन्होंने शायद केंद्र सरकार के डर से मना कर दिया या हो सकता है उनको लगा हो की सिर्फ एक राज्यसभा सीट के लिए उनको AAP पार्टी के हर निर्णय की जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी मीडिया AAP की हर अच्छी बुरी खबर को उनसे जोड़कर बताएगी और वो अभी किसी पार्टी से जुड़ना ना चाहते हों। इसके कई कारण हो सकते हैं लेकिन पार्टी को अंततः जो दो नाम ठीक लगे वो आपके सामने हैं। आप इनसे सहमत या असहमत हो सकते हैं लेकिन आख़िरकार रिव्यु तो परफॉरमेंस के आधार पर और पॉलिसी के आधार पर दिया जाता है तो इन्हें राज्यसभा में अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए कुछ समय अवश्य मिलना चाहिए।



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