सुरक्षित भारत की असुरक्षित महिलायें

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सरकारी व गैर-सरकारी संगठनों द्वारा महिला सशक्तीकरण के लिए अनेक अभियान चलाए जाने के पश्चात् भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की मानें तो पिछले एक दशक में महिलाओं के प्रति होने वाले ‘गंभीर अपराध’ घटे नहीं अपितु बढ़े ही हैं। पर इन अपराधों के मामले में अलग-अलग राज्यों के बीच बड़ा अंतर है। दिल्ली, असम और हरियाणा ( महिलाओं के लिए सबसे खराब) जैसे राज्यो में ऐसे अपराध आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और सिक्किम (महिलाओं के लिए सबसे अच्छे राज्य) जैसे राज्यों की अपेक्षा कई गुना अधिक होते हैं। महिलाओं के प्रति होने वाले कुल अपराधों के 34% का संबंध केवल तीन राज्यों, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र, से है।

पर अलग-अलग राज्यों में इन अपराधों की मात्रा में अंतर क्यों है? इसका उत्तर राज्यों की समृद्धि, जनसांख्यिकी, रोजगार उपलब्धता, साक्षरता, शासन व्यवस्था और मीडिया की पहुंच आदि में छिपा है। ऐसा पाया गया है कि राज्य के प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (per capita GDP) में 1% वृद्धि होने पर महिलाओं के प्रति गंभीर अपराधों में 0.42% कमी आती है। जहां पुरुषों में नशे की लत कम होती है वहां भी ऐसे अपराध कम देखे जाते हैं। इसके अतिरिक्त लिंगानुपात में 1% की वृद्धि से इन अपराधों में 8% की कमी आती है। उल्लेखनीय है कि महिलाओं के प्रति अपराध में कमी लाने में लिंगानुपात का समृद्धि की तुलना में अधिक प्रभाव होता है। यही कारण है दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में समृद्धि के बावजूद इन अपराधों की उच्च दर देखने को मिलती है क्योंकि इनमें लिंगानुपात निम्न है। महिलाओं की साक्षरता और रोजगार उनके प्रति अपराधों में कमी लाने में अत्यधिक सहायक हैं। एक बात यह भी सामने आई है कि हिंदू समाज में महिलाओं के प्रति मुस्लिम समाज की अपेक्षा अधिक अपराध होते हैं। महिलाओं के प्रति अपराधों का संबंध अप्रभावी नीतियों और अकुशल न्याय व्यवस्था से भी है। यदि पिछले एक दशक में समृद्धि बढ़ने और लिंगानुपात में सुधार के बावजूद भी महिलाओं के प्रति अपराधों में बढ़त हुई है तो उसका एक कारण खराब शासन व्यवस्था भी है।

दीर्घावधि में महिला सशक्तिकरण के लिए एक बहुसूत्री कार्यक्रम की आवश्यकता है जिसमें शिक्षा, लिंगानुपात, रोजगार, नशामुक्ति, मीडिया की पहुंच, शासन व्यवस्था में सुधार आदि सम्मिलित होने चाहिए। पर ऐसे कार्यक्रम तभी सफल हो सकते हैं जब महिलाएं अपनी हीन भावना से और पुरुष अपनी रूढ़िवादी सोच से बाहर निकलें।

~Yamini Singh



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