जानें दिल्ली की शान सिग्नेचर ब्रिज की खासियत। इसमें लगे एशिया के सबसे ऊंचे पायलन पर चढ़कर दिल्ली का अद्भुत नजारा देखना होगी हर किसी की तमन्ना | delhi bridge

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खत्म हुआ 14 सालों का इंतेज़ार, आम जनता के लिए बनकर तैयार हुआ दिल्ली की शान सिग्नेचर ब्रिज… केजरीवाल सरकार की ओर से दिल्लीवालों को दीवाली का तोहफा !

दिल्ली के वजीराबाद में यमुना नदी पर बने जिस बहु- प्रतीक्षित सिग्नेचर ब्रिज का दिल्ली की जनता को पिछले 14 साल से इंतजार है, कल दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसका फाइनल इंस्पेक्शन कर ऐलान किया कि रविवार 4 नवम्बर की शाम को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसका उद्घाटन करेंगे और अगले दिन सुबह से इसको आम जनता के उपयोग के लिए खोल दिया जाएगा। दिल्ली सिग्नेचर ब्रिज इतना शानदार होगा कि ये किसी अजूबे से कम ही नहीं होगा।

दिल्ली की शान सिग्नेचर ब्रिज की खासियत


इस सिग्नेचर ब्रिज की खासियत के बारे में बात करे तो इस सिग्नेचर ब्रिज के टॉप पर एक ग्लास हाउस बनेगा। वह ग्लास हाउस पूरा कांच का होगा जिसे अंग्रेजी में पायलन हेड भी कहते हैं। उस ग्लास हाउस में खड़े होकर पूरी दिल्ली को देख सकते हैं और वहा से पूरी दिल्ली का व्यू बहुत अच्छा दिखाई देगा।

चूंकि यह दिल्ली का सबसे ऊचा हिस्सा होगा। उस ग्लास हाउस में जाकर पूरी दिल्ली को देखना हर किसी की तमन्ना होगी। इस ग्लास में जाने के लिए ब्रिज के ऊपर बने दो पिलरों में चार लिफ्ट लगाई जाएगी। एक पिलर के अंदर दो लिफ्ट लगाई जाएगी जिससे कि ग्लास तक पहुंचने के लिए लिफ्ट का प्रयोग किया जाएगा।

इसकी ऊंचाई कुतुब मीनार की दोगुनी से भी ज़्यादा है। जिससे यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। ब्रिज पर 15 स्टे केबल्स हैं जो बूमरैंग आकार में हैं। जिन पर ब्रिज का 350 मीटर भाग बगैर किसी पिलर के रोका गया है। ब्रिज की कुल लंबाई 675 मीटर चौड़ाई 35.2 मीटर है।

अगर हम दिल्ली सिग्नेचर ब्रिज को दूर से देखेगें तो धनुष के आकर का दिखाई देगा। ये सिग्नेचर ब्रिजबस दो स्टील के पिलरों पर टिका होगा। जो कि ब्रिज के ऊपर ही होंगें। इस ब्रिज के नीचे किसी भी प्रकार की कोई सपोर्ट नहीं होंगी, तथा इन पिलरों पर स्टील तार लगे होने जो की पूल की नीचे की सतह से अटैच होंगे। यह किसी कमाल से कम नहीं होगा कि ये पूरा सिग्नेचर ब्रिज इन स्टील तारो पर ही टिका हुआ होगा।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि कि इसमें देश ही नहीं एशिया का सबसे ऊंचा पायलन लगा है। लिफ्ट के जरिये जब आप इसके ऊपर पहुचेंगे तो वहां से दिखने वाला दिल्ली का नजारा अद्भुत होगा। आने वाले समय में दिल्ली सरकार द्वारा बनाया गया ये सिंगनेचर ब्रिज देश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित होगा।

किसको मिलेगा फायदा?


यमुना नदी पर बना यह ब्रिज उत्तर पूर्वी दिल्ली को करनाल बाई पास रोड से जोड़ेगा। इस ब्रिज के बन जाने से उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार गोकुलपुरी भजनपुरा और खजूरी की तरफ से मुखर्जी नगर, तिमारपुर, बुराड़ी और आजादपुर जाने वाले लोगों बड़ी राहत मिलेगी जो रोजाना वजीराबाद पुल के जरिए अपना सफर करते हैं और आधा से एक घंटे का समय उन्हें लग जाता है। अब इस delhi bridge की सहायता से वे यह सफर मिनटों में कर पाएंगे।

मनीष सिसोदिया ने ख़ास ध्यान दिया


दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पर्यटन मंत्रालय का कार्यभार संभालते ही सबसे पहले सिग्नेचर ब्रिज का काम अपने हाथ में लिया था। पर्यटन मंत्रालय के तहत आने वाला दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण कर रहा है। मनीष सिसोदिया ने लगातार अफसरों पर इस ब्रिज को जल्द से जल्द पूरा करने का दबाव बनाया। यही नहीं क्योंकि वह दिल्ली के वित्त मंत्री भी हैं इसलिए इस प्रोजेक्ट में वित्त संबंधी सभी समस्याओं का उन्होंने जल्द से जल्द निपटारा कराया। जिसके चलते सिग्नेचर ब्रिज कुछ जल्दी तैयार हो पाया।

कितनी देरी और कितनी बढ़ी लागत


जहां दिल्लीवालों ने सिग्नेचर ब्रिज के लिए किया 14 साल का इंतेज़ार, वहीं सिग्नेचर को पूरा होने के लिए करना पड़ा दिल्ली में केजरीवाल सरकार बनने का इंतेज़ार।

इस तरह के delhi bridge के बारे में 1997 में सोचना शुरू किया गया था और यह योजना 2004 में जाकर एक ठोस योजना में बदली। उस समय इसकी लागत करीब 464 करोड़ ₹ अनुमानित थी। साल 2007 में शीला दीक्षित कैबिनेट ने इसको मंज़ूरी दी।

शुरुआत में लक्ष्य रखा गया कि इसको 2010 की कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन इसके निर्माण की शुरुआत ही कॉमन वेल्थ खेल 2010 के दौरान हो पाई। साल 2011 में इसकी कीमत बढ़कर 1131 करोड़ ₹ हो गई।

और अब आखिरकार केजरीवाल सरकार बनने के बाद जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पर्यटन मंत्रालय का कार्यभार अपने सबसे करीबी और विश्वास प्राप्त उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिया तब इस पर एक्शन मोड में काम शुरू हुआ। और 14 साल का लम्बा इंतेज़ार खत्म होते हुए आखिरकार सिग्नेचर ब्रिज कुल 1518.37 करोड़ ₹ की लागत में बनकर आम जनता के लिए खुलने को तैयार है।



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