आप की शिक्षा क्रांति की धमक देश-विदेश के बड़े-बड़े शिक्षाविदों को खींच लाई दिल्ली के सरकारी स्कूलों में

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शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार दिल्ली सरकार की प्रमुख सफलताओं में से एक है। दिल्ली सरकार शिक्षा को लेकर कितनी सजग है इसका पता इस बात से चलता है कि उन्होंने बजट का सबसे ज्यादा पैसा 25% शिक्षा बजट के लिए आवंटित किया है। सरकार ने दिल्ली के नौनिहालों को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए ना सिर्फ वर्ल्ड क्लास स्कूल बनाये साथ ही टीचर्स को भी विदेशों में ट्रेनिंग के लिए भेजा। इसका रिजल्ट बोर्ड परीक्षाओं में प्राइवेट स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों के बच्चों के बेहतर परिणाम के रूप मे देखने को भी मिला। मिशन बुनियाद के जरिये दिल्ली सरकार ने बच्चों की रीडिंग कैपेबिलिटी को बढ़ाने का प्रयास किया। साथ ही पहली बार सरकारी स्कूलों में इंग्लिश स्पोकन क्लास शुरू हुई। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने दुनिया में पहली बार हैप्पीनेस करिकुलम शुरू किया जिसका उद्घाटन स्वयं दलाई लामा ने किया। हैप्पीनेस करिकुलम की नेक पहल विदेशों से काफी प्रशंसा बटोर रही है।

इस वर्ष दिल्ली सरकार को मिला शिक्षा और स्किल को लेकर एशियन समिट होस्ट करने का मौका, जिसमें 15 देशों से 300 से ज्यादा डेलीगेट्स हुए शामिल। इसमें भारत के 14 राज्यों और दुनियाभर के 15 देश शामिल हुए। हर देश की अलग-अलग शिक्षा तकनीक है जिसे एक छत के नीचे देशभर के लोगों को एकसाथ समझने का मौका मिला।

‘कल की दुनिया के लिए सीखना’ थीम पर आयोजित इस एजुकेशन समिट में दुनिया के बड़े-बड़े शिक्षाविदों ने साथ बैठकर शिक्षा नीति को और बेहतर बनाने पर किया विचार-विमर्श।

इनमें से ज्यादातर शिक्षाविद दिल्ली सरकार के हैप्पीनेस करिकुलम को जानने के लिए दिल्ली के सरकारी स्कूलों को विजिट करने के लिए दिखे इक्छुक।

ये दिल्ली की शिक्षा क्रांति की धमक ही है जो देश-विदेश के बड़े-बड़े शिक्षाविदों को दिल्ली के सरकारी स्कूलों में खींच लाई है ! अफ़ग़ानिस्तान के शिक्षा मंत्री, UAE के स्कूल के प्रधानाचार्य व छत्तीसगढ़ के शिक्षा निर्देशक सहित अन्य गणमान्य लोगों ने दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया संग राउस एवेन्यू के सर्वोदय बाल विद्यालय का दौरा किया और दिल्ली की शिक्षा नीति और हैप्पीनेस करिकुलम के बारे में जाना!

सिसोदिया ने कहा कि अलग-अलग देश किस तरह कीशिक्षा तकनीक अपना रहे हैं। यह जानना बेहद जरुरी है। शिक्षा को लेकर कई देश नए नए प्रयोग कर रहे हैं। श्रीलंका, थाईलैंड जैसे देश हैप्पीनेस कार्यक्रम के बारे में रूचि दिखा रहे हैं। जबकि कई देशों का टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम बेहद दिलचस्प हैं।

एशियन समिट की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब मनीष सिसोदिया से पूछा गया कि बच्चों की किताबों का बोझ कम कैसे होगा? सिसोदिया ने जवाब दिया ‘हमें बदलती हुई तकनीक को स्वीकारना भी होगा। बच्चों पर किताब का बोझ था क्योंकि गूगल नहीं था। जब गूगल नहीं था तब बच्चे रटने का काम करते थे। हमने दिल्ली में 25 फीसदी सिलेबस कम कर दिया। हमने भारत सरकार के सामने मांग रखी है कि NCERT की किताबों का सिलेबस 50 फीसदी कम होना चाहिए।’

 



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