मोदी सरकार देगी जनता को 440 वोल्ट का झटका, पेट्रोल की तरह बढ़ेंगे देश में बिजली के दाम

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“ नई व्यवस्था ला रही है मोदी सरकार, देश में मचेगा हाहाकार !  ”

पेट्रोल के बाद अब जनता पर बिजली की भी मार पड़ने वाली है केंद्र की मोदी सरकार इलेक्ट्रिसिटी एक्ट -2003 में संशोधन करने वाली है। जिसके बाद बिजली का सारा कंट्रोल प्राइवेट कंपनियों के हाथ में चला जाएगा। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट -2003 में अगर ये बदलाव लागू हो गए तो बिजली के दाम आसमान छूने लगेंगे और आम लोगों के लिए बिजली बिल के खर्च को सहना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

पेट्रोल की तरह बढ़ेंगे बिजली के दाम :


जिस तरह आज पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं ठीक उसी तरह इस बिजली बिल संशोधन के बाद देश में बिजली के दाम भी बढ़ेंगे। आज देश में पेट्रोल-डीजल के दाम तय करने का पूरा अधिकार प्राइवेट तेल कम्पनियों के पास है और वो अपने हिसाब से रोज पेट्रोल के दाम बढ़ाती रहती हैं। ठीक इसी प्रकार ये संशोधन लागू होने के बाद अडानी पावर और अम्बानी पावर जैसी बिजली कम्पनियां बिजली के रेट भी तय करेंगी और पेट्रोल की तरह रोज बिजली के रेट भी बढ़ाती जायेंगी।

उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश :


मोदी सरकार द्वारा लाये जा रहे संशोधन का मकसद कुछ खास कम्पनियों को फायदा पहुंचाना है। साथ ही बिजली के क्षेत्र में राज्य की सरकारों की पावर को खत्म कर केंद्र पूरी तरह से अपना अधिकार करना चाहता है। केंद्र सरकार के इस संशोधन से बिजली के बिलों में 2 से 5 गुना तक का इजाफा हो जाएगा।

पहली बार बिजली क्षेत्र में शुरू होगी सट्टा बाजारी  :


बिजली के क्षेत्र में इतिहास में पहली बार मोदी सरकार सट्टा बाजारी यानी फ्यूचर ट्रेडिंग शुरू करने जा रही है। अब यहाँ भी जुआ चलेगा जिसका फायदा सिर्फ और सिर्फ मोदी के दोस्त  और इसका बुरा असर पूरे देश की जनता को भुगतना पड़ेगा। जब कोंग्रेस सरकार ने कमोडिटी मार्केट में सट्टा बाजारी शुरू की थी तो सबने देखा कि कितनी सारी चीजों के दाम अनाप-शनाप बढ़ गए थे। अब बिजली के क्षेत्र में भी यही होगा, देश में बिजली के बिल में अनाप-शनाप बढ़ोतरी हो जाएगी।

प्राइवेट कम्पनियां तय करेंगी बिजली के दाम :


अगर केंद्र सरकार इलेक्ट्रिसिटी एक्ट -2003 में ये संशोधन पास करा लेती है तो बिजली क्षेत्र पर पूरी तरह से अम्बानी-अडानी जैसी बड़ी बिजली कम्पनियों का कब्जा हो जाएगा और वो अपने हिसाब से जितना चाहे बिजली बिल को बढ़ा सकती हैं।

किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं पर गिरेगी गाज :


अभी हर राज्य में घरेलू उपभोक्ताओं को कम रेट पर बिजली उपलब्ध होती है, वहीं इंडस्ट्रियल और कॉमर्शियल के रेट ज्यादा होते हैं। कई राज्यों में किसानों को 50 पैसे पर बेहद सस्ती बिजली दी जाती है। लेकिन मोदी सरकार पूरे स्लैब सिस्टम को खत्म करने जा रही है। जिससे अब किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को राज्य सरकार सस्ती बिजली नहीं दे पाएगी। सभी को कॉमर्शियल जितनी रेट पर महंगी बिजली मिलेगी।
उदाहरण के लिए दिल्ली में इस समय 200 यूनिट से कम बिजली इस्तेमाल करने वालों को 1 रुपये प्रति यूनिट की रेट पर और 200-400 यूनिट इस्तेमाल करने वालों को 2.5 रुपये प्रति यूनिट पर बिजली मिलती है जो मोदी सरकार का नया कानून लगने पर बढ़कर 7.40 रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी। और अभी तो इसमें सट्टा बाजारी के कारण बढ़ने वाले दाम नहीं जोड़े हैं अगर वो जुड़े तो बिजली के 10 रुपये प्रति यूनिट तक चली जायेगी। यानी कि इसकी सबसे जबरदस्त मार देश के गरीब और मध्यमवर्गीय जनता पर पड़ेगी। और बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता की चीज उसके बजट से बाहर की बात हो जाएगी।

बदले में बिजली कम्पनियां देंगी BJP को चुनावी फंड :


बिजली बिल बढ़ाने के एवज में मोदी सरकार चुनाव लड़ने का फंड एकत्रित करेगी। ऐसी अफवाह है कि ये बिजली कंपनियां इसके बदले में चुनाव के लिए मोदी सरकार को भारी-भरकम फंड देंगी। वरना लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बिजली को 5 गुना तक महंगा करने का ऐसा खतरनाक बिल लाकर BJP ऐसा आत्मघाती कदम ना उठाती।

मुख्यमंत्री केजरीवाल उठाएंगे इसके खिलाफ आवाज :


केजरीवाल ने कहा कि “मैं देश के हर मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखूँगा और हर नॉन BJP मुख्यमंत्री से मिलकर उनको यह बताऊंगा की किस तरह से देश के पावर सेक्टर को खत्म किया जा रहा है, मैं सभी से अनुरोध करूँगा कि मिलकर इसका विरोध करें। हम इसको किसी हालत में राज्यसभा में पास नहीं होने देंगे जरूरत पड़ी तो इस बिल के खिलाफ सड़कों पर भी उतरेंगे।”

 



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