फेल हो गए मोदी सरकार के सारे पैंतरे जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मनीष सिसोदिया ने विश्वपटल पर रखा ‘हैप्पीनेस करिकुलम’ मॉडल।

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दिल्ली केजरीवाल द्वारा दिल्ली में शूरु की गई हैप्पीनेस क्लासेस का डंका विश्वभर में बज रहा है। इसी से प्रभावित होकर ऑस्ट्रिया ने मनीष सिसोदिया को अपने यहां एजुकेशन से में हैप्पीनेस क्लासेस का मॉडल समझाने के लिए आमंत्रित किया था।

इसी से घबराई मोदी सरकार ने उनके विदेश जाने पर रोक लगा दी थी। विदेश मंत्रालय ने पोलिटिकल एंगल का हवाला देते हुए सिसोदिया को ऑस्ट्रिया जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद उन्हें अपना दौरा रद्द करना पड़ा था।

लेकिन दुनिया को हैप्पीनेस क्लासेस का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षमन्त्री मनीष सिसोदिया ने हार नहीं मानी। ऑस्ट्रिया में सोशल एंड इमोशनल एजुकेशन पर आयोजित समिट में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मनीष सिसोदिया ने हैप्पीनेस क्लासेस का मॉडल प्रस्तुत किया।

कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्री संग टीचर्स ने हैप्पीनेस क्लासेस पर अपना फीडबैक दिया। साथ ही बच्चों ने भी बताया कि इससे उनके जीवन पर क्या खास प्रभाव पड़ा है।

माइंडफुलनेस : पहले पेरेंट्स की यह शिकायत होती थी कि बच्चे उनकी बात नहीं सुनते। हैप्पीनेस क्लासेस में ‘माइंडफुलनेस’ के जरिये इस पर बहुत प्रभाव पड़ा है। बच्चों ने माइंडफुलनेस ट्रेनिंग का शुक्रियादा करते हुए बताया कि अब वे बेहतर तरीके से कंसंट्रेट कर पाते हैं।

बच्चों को स्वयं को अभिव्यक्त करना सीखना : बच्चों को सिखाया गया की कोई भी जवाब सही नहीं होता, कोई भी जवाब गलत नहीं होता। जिससे बच्चों में अपनी बात को अभिव्यक्त करने का कॉन्फिडेंस उत्पन्न हुआ।

टीचर्स ने बताया कि हैप्पीनेस क्लासेस शुरू होने के बाद से बच्चों और टीचर्स के बीच रिश्ता बहुत बेहतर हुआ है। साथ ही बच्चों के स्वभाव में भी बहुत बदलाव हुआ है। अब बच्चे पहले के मुकाबले ज्यादा खुश और हँसमुख नजर आते हैं। उनकी अटेंडेंस भी बेहतर हुई है। अब बच्चे कोई आनाकानी नहीं करते बल्कि वे खुद से स्कूल आना चाहते हैं और पढ़ाई पर कॉन्सन्ट्रेट करते हैं। साथ ही हैप्पीनेस क्लासेस में होने वाली एक्टिविटीज से बच्चों में काफी क्रिएटिविटी भी डेवलप हुई है।

सिसोदिया ने कहा कि अगर आप कोई बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं तो आपको पूरे सिस्टम को बदलना होगा। आप सिर्फ एक टीचर पर सब कुछ नहीं छोड़ सकते आपको स्कूल की कमेटी बनाकर सभी की जिम्मीदरी तय करनी होगी। जबतक सब एकसाथ मिलकर सिस्टम की तरह काम नहीं करते तब तक हम लॉन्ग-टर्म पॉजिटिव बदलाव नहीं ला सकते।

सिसोदिया ने कहा कि केंद्र के दबाव के बावजूद हैप्पीनेस मॉडल दुनिया के लिए प्रेरणा बनेगा। उन्हीने बताया कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि पूरी दुनिया दिल्ली के शिक्षा मॉडल को जानना चाह रही है। मलेशिया, अफगानिस्तान और अरब देशों के मंत्रियों ने भी हैप्पीनेस मॉडल पर बात की, उनके मंत्रियों और अधिकारियों ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का दौरा कर इसके बारे में जानकारी ली है। दिल्ली में हैप्पीनेस करिकुलम लागू हुए मात्र 3 महीने ही हुए हैं लेकिन इतने कम समय में भी में हैप्पीनेस करिकुलम से बहुत बेहतर फीडबैक मिल रहा है।



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