Notebandi : कालेधन को यूँ करके गुलाबी, मोदी जी लाए देश की बर्बादी। नोटबन्दी के जन्मदाता श्रीमान मोदी जी बताइए आपका फेवरेट चौराहा कौन सा है?

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आज नोटबन्दी घोटाले का दूसरा बर्थ डे है। आज ही से ठीक 2 साल पहले 8 नवम्बर, 2016 को रात 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने एक तानाशाही फरमान जारी करते हुए देश में चलने वाले 500 और 1000 के बड़े नोटों को बन्दकरते हुए देश की आधी अर्थव्यवस्था को ठप्प कर दिया था।

विकास पैदा करने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री मोदी से सबको खुशखबरी का बेसब्री से इंतेज़ार था लेकिन वे तो लगातार हनीमून पीरियड ना मिलने और 9 महीने में तो बच्चा भी पैदा नहीं होता का बहाना देते हुए बचते आ रहे थे। यूँही विदेश घूमते कब ढाई साल बीत गए पता ही नहीं चला।

उत्तर प्रदेश में चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही मोदी जी का इतना प्रेशर बढ़ा की उन्होंने देश के सबसे बड़े घोटाले को जन्म दे दिया। भ्रष्ट राजनेताओं और बड़े-बड़े उद्योगपतियों की मिलीभगत से जन्में इस पाप को देशभक्ति का चोला पहनाकर ‘नोटबन्दी’ का नामकरण दे दिया गया।

दरअसल मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करके बड़े-बड़े उद्योगपतियों को करोड़ो का लोन दिलवा दिया था, और हमेशा की तरह ये उद्योगपति जनता के उन पैसों को डकार गए और लोन की ब्याज तक ना जमा की। आसमान छूते NPA ने देश की सरकारी बैंकों की हालत खस्ता कर दी।

अब इन खाली बैंकों को वापस भरने के लिए BJP ने नयी साजिश रची। देश में चलने वाले 500 और 1000 के बड़े नोटों को बन्दकर देश की समस्त जनता को उन्हें बैंकों में वापस जमा करने को मजबूर कर दिया। और देश की भोली-भाली जनता भी देशभक्ति के नाम पर अपनी खून-पसीने की कमाई को एक बार उद्योगपतियों को ऐश कराने के लिए सरकार को सौंप आयी।

मोदी सरकार ने जनता के विश्वास का गला घोंटते हुए देश में मौजूद कालेधन को गुलाबी कर डाला। RTI में हुए खुलासे ने सबको चौंका दिया की कैसे सहकारी बैंकों के जरिये भ्रस्टाचारियों के कालेधन को बैंकों में जमाकर उसे गुलाबी नोटों में तब्दील कर दिया गया। जहां आम जन को अपनी ईमानदारी की कमाई को भी बैंकों में जमा करने के लिए जी-जान एक करनी पड़ी वहीं भ्रस्टाचारियों ने आसानी से बिना लाइनों में लगे पिछले दरवाजे से अपनी सारी काली कमाई बैंकों में पहुंचा दी जिसे खुद PM ने 2000 के गुलाबी नोटों में तब्दील कर दिया।

RTI में पता चला कि अहमदाबाद की एक जिला सहकारी बैंक (एडीसीबी) ने PM नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा करने के बाद महज पांच दिन के भीतर 745.59 करोड़ रुपये मूल्य के प्रतिबंधित नोट प्राप्त किए थे जबकि इतने कम समय में इतने अधिक नोटों को गिन सकना ही मुमकिन नहीं है फिर बिना गिने बैंकों में नोट कैसे जमा हो सकते हैं। तब पता चला कि इस बैंक के अध्यक्ष तो स्वयं BJP अध्यक्ष और PM मोदी के परम मित्र अमित शाह हैं।

अमित शाह की बैंक एडीसीबी के बाद सबसे ज्यादा प्रतिबंधित नोट जमा करने वाला सहकारी बैंक राजकोट जिला सहकारी बैंक है जिसके अध्यक्ष गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार में कैबिनेट मंत्री जयेशभाई विट्ठलभाई रडाड़िया हैं। इस बैंक ने 693.19 करोड़ रुपये मूल्य के प्रतिबंधित नोट जमा लिए थे।

बताते हैं कि PM मोदी सहायता से 11,400 करोड़ ले भागने वाले नीरव मोदी ने नोटबन्दी से ठीक एक दिन पहले करोड़ों रुपये का कैश बैंक में जमा कराया था। इसी प्रकार कई BJP नेताओं ने नोटबन्दी से ठीक पहले अपने नाम करोड़ो की जमीनें खरीद कालेधन को ठिकाने लगाया। बचा-खुचा कालाधन अपनी सहकारी बैंकों के जरिये गुलाबी में तब्दील करवा ही लिया गया था।

यही वजह है कि नोटबन्दी के दौरान 99.3% पैसा बैंकों में वापस लौट आया। हालांकि PM मोदी ने इतिहास रचते हुए लालकिले से 3-4 लाख का कालाधन पकड़े जाने का झूठ बोला और उस झूठ को छिपाने के लिए RBI की सालाना रिपोर्ट को 1 साल तक रोके रखा कि RBI अभीतक नोटों की गिनती नहीं कर पायी है। लेकिन जब सच सामने आया तो साफ हो गया कि देश में मौजूद सारा कालाधन बैंकों में पहुंचा दिया गया है।

मोदी सरकार के वादे के अनुसार ना तो भ्रष्टाचार रुका, ना ही आतंकवाद रुका, ना नकली करंसी रुकी, ना रुपया मजबूत हुआ, ना नक्सलवाद रुका, ना कालाधन पकड़ा गया बल्कि इससे उलट इन सभी चीजों की स्थिति बद से भी बदत्तर हो गयी है।

प्रिंटिंग और दूसरी लागत में वृद्धि का असर RBI द्वारा सरकार को दिए जाने लाभांश पर पड़ा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2016-17 में उसकी आमदनी 23.56 प्रतिशत घट गई जबकि व्यय यानी खर्च दोगुने से भी ज्यादा 107.84 प्रतिशत बढ़ गया।

नोटबन्दी के कारण कितनी बेटियों की शादियां टूट गयीं, कितने लोग सदमें से मर गए, सौ से अधिक लोग बैंकों की लाइनों में मर गए, छोटे व्यापारी तबाह हो गए, लाखों लोग बेरोजगार हो गए, रोजी-रोटी कमाने वाले मजदूरों के भूखे मरने की नौबत आ गयी। अब तो गुस्साई जनता बस यही पूछ रही है की हे नोटबन्दी के जन्मदाता श्रीमान मोदी जी बताइए आपका फेवरेट चौराहा कौन सा है?



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