अम्बानी के दलाल का राष्ट्रवादी घोटाला, एक ‘राफेल’ का कमीशन तुम क्या जानो भारतवासियों

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अम्बानी के दलाल का राष्ट्रवादी घोटाला, एक ‘राफेल’ का
कमीशन तुम क्या जानो भारतवासियों

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद द्वारा एक इंटरव्यू के दौरान किये गए खुलासे से पूरे भारत में हड़कम्प मच गया है की 60 साल से रक्षा उपकरण का निर्माण कर रही भारत की HAL कम्पनी को राफेल करार से बेदखल कर अम्बानी की रिलायंस डिफेंस के साथ सौदा करने का प्रस्ताव मोदी सरकार ने ही रखा था जिससे फ्रांस के पास कोई विकल्प नहीं बचा था। फ्रांस के इस खुलासे से मोदी सरकार चौतरफा घिर गयी है।

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने बताया कि पहले भारत और फ्रांस के बीच 126 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे के सम्बंध में समझौता चल रहा था जिसमें 70% यानी कि 108 राफेल विमान का निर्माण भारत में होता जिसके निर्माण का ठेका भारत की सरकारी कम्पनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को मिलता और इसके लिए फ्रांस की डसॉल्ट कम्पनी विमान के निर्माण की टेक्नोलॉजी भारत के साथ सांझा करती। और भारत को एक राफेल विमान की कीमत 526 करोड़ ₹ चुकानी होती।

लेकिन 2014 में जब सरकार बदली तो नए प्रधानमंत्री मोदी जी 10 अप्रैल, 2015 में फ्रांस के दौरे पर प्रेसिडेंट ओलांद से मिले और 36 राफेल जेट की 7.87 बिलियन (59 हजार करोड़ ₹) की नयी राफेल विमान डील की घोषणा की, जिसमें अचानक से एक राफेल की कीमत 526 करोड़ ₹ से बढ़कर 1600 करोड़ ₹ हो गयी।

खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बताने वाली मोदी सरकार ने देश के रक्षा सौदे ‘राफेल’ में किया है आजादी के बाद से अबतक का सबसे बड़ा घोटाला।

जब तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने दूरदर्शन पर कहा कि यह एक रणनीतिक ख़रीद है। इसे प्रतिस्पर्धी टेंडर के ज़रिये नहीं किया जाना चाहिए था यानी बिना टेंडर के ही ख़रीदा जाना उचित है। तभी इस पर संदेह शुरू हो गया था।

मोदी सरकार का तर्क है कि नए राफेल विमानों में परमाणु हथियार भी लोड किया जा सकता है इसलिए इसकी कीमत बढ़ गयी जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये देश के दूसरे लड़ाकू विमानों जैसे ‘सुखोई 30MKI’ के साथ भी किया जा सकता है। फिर सवाल खड़ा होता है कि वास्तविक कीमत से इतना महंगा क्यों खरीदा जा रहा है ?

28 मार्च 2015 को दिवालिया अनिल अंबानी ‘रिलायंस डिफेंस’ नाम की कम्पनी का पंजीकरण कराते हैं। मोदी की पेरिस यात्रा से 2 दिन पहले तक 126 राफेल विमानों की डील फ्रांस की डसॉल्ट और भारत की HAL के साथ चल रही थी। लेकिन फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के अनुसार मोदी जी ने 10 अप्रैल, 2015 में अपनी पेरिस यात्रा के दौरान 126 विमानों की जगह मात्र 36 विमान और HAL की जगह अम्बानी की रिलायंस डिफेंस के साथ करार करने का प्रस्ताव रखा।

ओलंदो के अनुसार ये फ्रांस के लिए पहली नजर में कुछ कम आकर्षक डील थी क्योंकि 126 विमानों की जगह 36 विमानों का ही सौदा होना था। लेकिन अच्छी बात यह थी कि अब सभी विमानों का निर्माण फ्रांस में ही होना था जिसकी कीमत पहले से कई गुना अधिक मिल रही थी।

मोदी सरकार का दावा था की डसॉल्ट और रिलायंस के बीच हुए समझौते में उनका कोई हाथ नहीं था। ये दो प्राइवेट कंपनियों के बीच की बात थी। लेकिन फ्रांस के खुलासे से मोदी सरकार के इस झूठे दावे की पोल खुल गयी है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का भी कहना है कि नियमानुसार रक्षा सौदे में कोई भी समझौता सरकार की अनुमति के बगैर नहीं हो सकता है। फिर 60 साल से रक्षा उपकरणों का निर्माण और देखरेख कर रही सरकार कम्पनी HAL को बेदखल कर एक दो हफ्ते पहले पंजीकृत हुई दिवालिया कम्पनी रिलायंस डिफेंस को ठेका बिना मोदी सरकार की अनुमति के कैसे मिल सकता है?

मोदी सरकार के राफेल घोटाले पर इस बड़े खुलासे के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्ट मोदी सरकार पर बड़ा हमला करते हुए कहा है कि “ये तो बेहद चौंकाने वाला है। प्रधान मंत्री जी जवाब दें कि उन्होंने अनिल अंबानी को क्यों थोपा? अनिल अम्बानी से प्रधान मंत्री जी का क्या रिश्ता है?

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने राफेल घोटाले पर PM मोदी से 3 सवाल करते हुए पूछा कि :

1. आपने ये ठेका अनिल अम्बानी को ही क्यों दिलवाया? और किसी को क्यों नहीं?
2. अनिल अम्बानी ने कहा है कि उनके आपके साथ व्यक्तिगत सम्बंध हैं।क्या ये सम्बंध व्यवसायिक भी हैं?
3. राफ़ेल घोटाले का पैसा किसकी जेब में गया- आपकी, भाजपा की या किसी अन्य की?

आप सांसद ने PM मोदी और रक्षा मंत्री से देश को धोखा देने के लिए तुरंत इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अंबानी को गिरफ्तार कर पूरा सच देश के सामने लाया जाए। उन्होंने BJP पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि ‘मैं BJP की आपत्ति से सहमत हूँ, छोटी मोटी चोरी करने वाले को चोर कहते हैं 36000 करोड़ रुपये की लूट करने वाले को तो डकैत कहते हैं।’

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मोदी सरकार के राफेल घोटाले को आजादी के बाद अबतक का सबसे बड़ा घोटाला बताया जा रहा है। मोदी सरकार द्वारा अम्बानी की दिवालिया प्राइवेट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए प्रत्येक विमान पर लगभग 1200 करोड़ ₹ का अधिक भुगतान कर कुल 39 हजार करोड़ रुपये की दलाली खाई-खिलाई जाने का अनुमान है।



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