दिल्ली में प्रदूषण पर सख्त केजरीवाल सरकार, Delhi Minister ने सम्भाल मोर्चा, लेकिन सो रही मोदी सरकार। कहीं प्रदूषण तो नहीं American President Trump के भारत ना आने की वजह | Pollution in hindi

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सर्दियां नजदीक आते ही एक बार फिर प्रदूषण की समस्या बढ़ने के अंदेशे पर दिल्ली में प्रदूषण से लड़ने को केजरीवाल सरकार एक्शन मोड में आ गयी है। और खुद उनके मन्त्री Delhi Minister इमरान हुसैन ने इसका मोर्चा संभाल लिया है। वे अपनी टीम के साथ सड़कों पर उतर आए हैं और जगह-जगह औचक निरीक्षण कर स्वयं इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या पर्यावरण सम्बन्धी नियमों का दिल्ली में ठीक से पालन हो रहा है।

प्रदूषण पर सख्त केजरीवाल सरकार

सोमवार को AAP के Delhi Minister इमरान हुसैन ने बवाना पहुंचकर वहां स्थित कंक्रीट की फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया। जहां उन्होंने पाया कि प्रदूषण के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट और NGT की गाइडलाइन का उलंघन किया जा रहा था जिसे देखकर आप के मंत्री भड़क उठे। उन्होंने बोर्ड की ओर से नोटिस जारी करते हुए तुरन्त कम्पनी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। आज मंगलवाल को भी उन्होंने महिपालपुर में अंडरपास& फ्लाईओवर की कंस्ट्रक्शन साइट का औचक निरीक्षण किया और उन पर नियमों की अनदेखी के लिए 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

केजरीवाल सरकार ने प्रदूषण से लड़ने के लिए काफी ईमानदार प्रयास किये हैं जैसे:- प्रदूषित इलाके में पानी का छिड़काव करना, ऑड-ईवेन स्किम लागू करना, नयी बसें खरीदकर सार्वजनिक वाहनों की संख्या बढ़ाना और सार्वजनिक वाहनों का किराया सस्ता कर लोगों को उसके इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना, प्रदूषण की धुंध को मिटाने के लिए केजरीवाल सरकार ने एन्टी स्मोग गन भी खरीदी गयी है इसके अलावा खुद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कमान संभालते हुए दिल्ली में प्लांटेशन ड्राइव शुरू की है जिसमें पूरी दिल्ली में डेढ़ लाख पौधे लगाए जा रहे हैं जिससे दिल्लीवालों को प्रदूषण से राहत मिल सके।

प्रदूषण की समस्या विकराल, सो रही मोदी सरकार

ज्ञात हो कि सर्दियों आते ही दिल्ली में प्रदूषण की समस्या यकायक बड़ जाती है। इसका मुख्य कारण दिल्ली से सटे पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में किसानों द्वारा पराली जलाना है जिसका धुंआ दिल्ली पहुंचकर इतना प्रदूषण पैदा करता है कि जनता के लिए स्वच्छ सांस लेना भी दूभर हो जाता है।

कई वर्षों से यह समस्या जारी है जिसका हल निकालने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार को और Delhi Minister इमरान हुसैन ने सभी पड़ोसी राज्यों को कई बार पत्र लिख-लिखकर गुजारिश की है कि कृपया अपने यहां के किसानों को सुविधा मुहैया कराएं जिससे किसानों को फसल काटने के पश्चात बची पराली को जलाने को मजबूर ना होना पड़े और इन पड़ोसी राज्यों से आने वाले धुएं का प्रदूषण दिल्लीवालों का दम ना घोटें।

बेहद अफसोस है कि मोदी सरकार ने स्वयं को तो प्रदूषण से बचने के लिए हाल ही में 144 air purifier खरीदकर PMO में लगाए हैं। लेकिन दिल्ली सरकार की इतनी गुजारिश के बाद भी प्रदूषण को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। उल्टा विरोध के बावजूद दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ाकर दोगुना कर दिया जिससे मेट्रो ट्रेन की रीडरशिप में भारी मात्रा में कमी आयी है जिससे साफ तौर पर प्रदूषण में इजाफा होने निश्चित है। साथ ही पड़ोसी राज्य सरकारों द्वारा भी किसानों को कोई मदद मुहैया नहीं करायी गयी है और अब उनके यहां से उठा पराली का यह धुआं एक बार फिर दिल्ली का दम घोंटने को तैयार है।

दिल्ली का प्रदूषण हो सकता है अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के भारत ना आने की वजह

2017 में अपने अमेरिकी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने American President Trump को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आने के लिए न्यौता दिया था। लेकिन डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद अमेरिका के व्हाइट हाउस ने मोदी का न्यौता अस्वीकार होने की सूचना देते हुए यह साफ कर दिया है की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भारत नहीं आएंगे।

आपको बता दें इससे पहले 26 जनवरी, 2015 को तत्कालीन American President Obama मोदी सरकार के न्यौते पर गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए थे लेकिन उस दौरान दिल्ली के जहरीले प्रदूषण ने उन्हें खास परेशान किया था। अमेरिका ने भारत की वायु को स्वास्थ्य के लिए ‘बेहद हानिकारक’ आंका था। जिसके बाद ओबामा के भारत दौरे के मद्देनजर भारत स्थित अमेरिकी एम्बेसी को भारी मात्रा में उच्च क्षमता वाले 1,800 पोर्टेबल air purifier खरीदने पड़े थे। ताकि राष्ट्रपति ओबामा और उनके साथ आई अमेरिकी टीम को दिल्ली के जहरीले प्रदूषण से बचाया जा सके।

ओबामा के दौरे के कारण भारत के विकराल प्रदूषण यह मुद्दा अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया में काफी उठा था जिसके कारण भारत को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था लेकिन अब 4 साल बीतने के बाद भी प्रदूषण के खिलाफ मोदी सरकार की उदासीनता, पराली के धुएं को रोकने के लिए सरकार द्वारा कोई प्रयन्त ना करना और सर्दी आते ही दिल्ली में वापस प्रदूषण का वही हाल होना अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत आने से इनकार करने की मुख्य वजह हो सकता है।

आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली की हवा इस कदर प्रदूषित है कि यहां सांस लेना रोजाना 50 सिगरेट पीने के बराबर हानिकारक है। पड़ोसी राज्यों से उठा धुंआ जब दिल्ली पहुंचता है तो सर्दियों के समय में उसमें मौजूद हानिकारक पार्टिकुलेट मैटर दिल्ली की हवा में ठहर जाते हैं और सांस के साथ अंदर पहुंचकर दिल्लीवालों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे हृदय और फेफड़ों के रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।



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